आज सब पहरेदार ...
बस मैं ही गुनाहगार ...
इस मतवाली सी फिजा मैं सब खरपतवार ...
दूब शांट ये नही बाबा हमे है इनसे इंकार ...
करो न जल्दी से प्यार का इजहार ....
फिर न होंगे घर वाले तैयार ....
या बना लो राखी का त्यौहार ...
खफा होना है बेकार ...
रात के चंद को ही ले लो .....
कितनी काली हो ये रात पर उसको तो निकलना है ...
उसको पता है उसकी रात कल के प्रभात तक ही जीवित रहेगी......
पर वो हर रात नयी रात के सपने लेकर रुप बदल कर ...
आकर बदल कर ...
हौसला ही जीवन का आधार है ...
आज सब पहरेदार है...
Friday, November 23, 2007
Saturday, November 3, 2007
गूगल देवता तू ही तू नज़र आए
तू ही तू नज़र आए
हमे सब तरफ़ एक तू ही तू नज़र आए
दिल तलाशता है जिस मंज़र को वो नज़र तो आए
दिल तलाशता है जिस मंज़र को वो नज़र तो आए
हम छोड़ देंगे पीना जाम से सनम
पहले तेरी आँखो में हमे मय मोहब्बत की तो नज़र आए
तय कर लेंगे हम तेरे साथ यह इशक़ का सफ़र
पर तेरे साथ हमे अपनी मंज़िल भी तो कोई दिखाए
निभा दी हैं हमने तो मोहब्बत की सब रस्मे
तेरी बातो से भी हमे कुछ वफ़ा की महक तो आए
सो जाएँगे तेरे बाहों के घेरे में हम सकूँ की नींद
पर तुझे भी तो कभी हमारी याद इस तरह शिद्दत से आए!!
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