सोचो अगर हम अपने दिमाग को भी कंप्यूटर के जसे फॉर्मेट कर सकते ? यार सभी दुंधली यादो को फ़ाइल के जसे एडिट कर पाते ? खराब यादों को निकाल बाहर करते , उनकी जगह अपने पसंद के ख्वाबों को जगह दे कर , शायद सपनो को भी हम पहले से ही प्ले लिस्ट में add कर लेते ताकि कोई अपने मन मुताबिक देखा जा सके ? अगर आप भी ऐसा सोचते है तो जरूर इस विषय पर चर्चा करें और अपना सुझाव अवश्य दें।
चलो इसे एक सवाल रखते हुए मैं यहीं से आगे शुरू करूँगा ..